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June 17, 2010

रोशन कर दो जहाँ

सुबह के अबोध धूप से रोशन होता हैं जहां ;
संध्या की लाली से ड्ख कर हो जाता हैं दुआं।
जीवन की भी लय यही हैं ;
बड़ी सीख मिलती हैं यहाँ।

ममता कि गोद से उतर के
जवानी के नशे में झूलते हैं हम।
ज़िन्दगी का मूल हूँ "मैं"
यह समज बैठ्ते हैं हम।

मांगों की अपार दौलत से
दुनिया लूट लेते हैं हम।
अपने अस्तित्व को भी
दांव पर लगा देते हैं हम।

अपने पराये
सबको दुःख दिए जाते हैं हम।
मैं को खुश किये जाते हैं हम।

हर ज़िन्दगी कट जाती हैं दोस्तों
पर जीने का वो अंदाज़ ही क्या
जो सिर्फ अपने लिए जीए?

ड्लती तो हैं हर शाम
पर वो शाम ही क्या
जो तारों को रोशन ना कर जाये दोस्तों ?

April 09, 2010

उड़ने दो ..! (भाग - १)


"एक अन्धेरा लाख सितारे , एक निराशा लाख सहारे
सबसे बड़ी सौगात हैं जीवन नादाँ हैं जो जीवन से हारे "

कल ही हम यह गाना "आखिर क्यूँ " चल चित्र से सुन रहे थे हमें लगा की कोई भी टूटा हुआ इंसान इस गाने के बोल सुनते ही फिर अपनी मंजिलों को पाने की जोश में जायेगा कितने सुन्दर पंक्तियाँ लिखे हैं कवी इन्दीवर ने चलिए इस गाने के पूरे बोल जान ले :

चलचित्र : आखिर क्यूँ (१९८५)
बोल: इन्दीवर
गीतकार: राजेश रोशन
गायक: मोहम्मद अज़ीज़

एक अन्धेरा लाख सितारे , एक निराशा लाख सहारे
सबसे बड़ी सौगात हैं जीवन नादाँ हैं जो जीवन से हारे

दुनिया की ये बगिया एसी- जितने काँटे , फूल भी उतने
दामन में खुद जायेंगे , जिनकी तरफ तू हाथ पसारे

बीते हुए कल की खातिर , तू आनेवाला कल मत खोना
जाने कौन कहा से कर , राहे तेरी फिर से सवारे

दुःख से अगर पहचान हो तो कैसा सुख कैसी खुशियाँ
तुफानो से लड़कर ही तो लगते हैं साहिल इतने प्यारे

वाह! क्या बोल हैंऐसे आशावादी शब्दों की ज़रुरत कभी कभी हम सबको होती हैं पर यह तो हुई उन दिनों की बात जब कवियों के ऐसी रचनाए रोज़ मर्रा ही निकलती थीआज कल के गानों में ऐसे उम्मीद भरें शब्द कभी कबार ही सुनने को मिलती हैंऐसा एक गाना कुछ साल पहले आया था और लोगों ने भी इसे खूब सराहा थाप्रस्तुत हैं एक ऐसी ही मनपसंद आशावादी कविता :

एल्बम: वैसा भी होता हैं
बोल और गायन: कैलाश खेर

टूटा टूटा एक परिंदा ऐसे टूटा
के फिर जुड़ ना पाया
लूटा लूटा किसने उसको ऐसे लूटा
के फिर उड़ ना पाया
गिरता हुआ वोह असमान से
आकर गिरा ज़मीन पर
ख्वाबों में फिर भी बादल ही थे
वो कहता रहा मगर
के
अल्लाह के बन्दे हसदे अल्लाह के बन्दे
अल्लाह के बन्दे हसदे जो भी हो कल फिर आएगा

खो के अपने पर ही तो उसने था उड़ना सीखा
घम को अपने साथ में ले ले दर्द भी तेरे काम आएगा
अल्लाह के बन्दे हसदे अल्लाह के बन्दे..


टुकड़े टुकड़े हो गया था हर सपना जब वोह टूटा
भिकरे टुकड़ों में अल्लाह की मर्ज़ी का मंज़र पायेगा
अल्लाह के बन्दे हसदे अल्लाह के बन्दे
अल्लाह के बन्दे हसदे जो भी हो कल फिर आएगा

और कुछ हम "उड़ने दो ..!" के अगली कड़ी में सुनायेंगे तब तक हमें आज्ञा दे!